देश-विदेश

अलविदा ! राहत इन्दौरी

इस दुनिया में नहीं रहे. राहत इंदौरी की कोविड-19 के इलाज के दौरान मृत्यु हुई. इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने पुष्टि की. उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद यहां एक निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया थी.

आज ही (मंगलवार) सुबह 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी थी. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखायी देने पर कल (सोमवार) मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.” इंदौरी ने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.” 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहत कुरेशी उर्फ राहत इंदौरी के पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी था जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था.

उनके कुछ चुनिन्दा शेर:

1. आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो.
मेरे हुजरे में नहीं, और कहीं पर रख दो,
आसमां लाये हो ले आओ, जमीं पर रख दो!
अब कहाँ ढूड़ने जाओगे, हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम, हमी पर रख दो!
उसने जिस ताक पर, कुछ टूटे दिये रखे हैं,
चाँद तारों को ले जाकर, वहीँ पर रख दो!

2. बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

3. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

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Koshi Live Team

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